शंकर की 450 करोड़ के भारी बजट वाली फिल्म गेम चेंजर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह के साथ आई। राम चरण और कियारा आडवाणी जैसे बड़े सितारों से सजी यह फिल्म भव्य एक्शन और दमदार संवादों का वादा करती है, लेकिन कमजोर कहानी और ढीले निर्देशन के कारण उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाती।
गेम चेंजर कहानी: एक पुराना संघर्ष नए कलेवर में
फिल्म की कहानी राम नंदन (राम चरण) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पहले एक आईपीएस अधिकारी होता है और बाद में आईएएस बनकर सिस्टम में बदलाव लाने की कोशिश करता है। उसकी प्रेमिका दीपिका (कियारा आडवाणी) उसे सलाह देती है कि समस्याओं का हल हिंसा से नहीं, बल्कि सही सोच और बुद्धिमानी से निकाला जा सकता है। दीपिका का किरदार केवल गानों और मोटिवेशनल डायलॉग्स तक सीमित है, जिससे फिल्म में उसका योगदान बेहद हल्का लगता है।
राम नंदन के पिता (राम चरण का दूसरा किरदार) एक सच्चे भ्रष्टाचार-विरोधी कार्यकर्ता थे, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा था। उनकी इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए राम नंदन भी सत्ता के भूखे मंत्री मोपिदेवी (एसजे सूर्या) से लड़ाई करता है।
फिल्म में एक सीन तब आता है, जब राम नंदन की शादी के बीच में पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंच जाती है। यहां तक कि हाथ में हथकड़ी लगे होने के बावजूद, वह गुंडों से भिड़ जाता है। इस एक्शन सीन को भव्य तरीके से फिल्माया गया है, लेकिन कहानी में तर्क की कमी महसूस होती है।
पहला भाग कमजोर, दूसरा भाग थोड़ा बेहतर
फिल्म का पहला भाग काफी बिखरा हुआ और शोरगुल भरा लगता है। कहानी में कई जगह तर्कहीन घटनाएं देखने को मिलती हैं। दीपिका का किरदार लगभग एक अतिरिक्त भूमिका जैसा है, जो केवल नायक को आगे बढ़ाने के लिए मौजूद है।
दूसरे भाग में कहानी थोड़ी गंभीर होती है, जब राम नंदन के पिता की बैकस्टोरी सामने आती है। यहां फ्लैशबैक का आधा घंटा फिल्म का सबसे दमदार हिस्सा है, जहां अनजली का किरदार ताजगी लाता है। हालांकि, कुल मिलाकर कहानी में कोई भी ऐसा मोड़ नहीं आता, जो आपको हैरान कर दे।
कॉमेडी और विलेन का ट्रैक: अधूरी कोशिश
फिल्म में कॉमेडी जोड़ने के लिए सुनील को एक साइडकिक के तौर पर पेश किया गया है, लेकिन उनका ट्रैक बहुत कमजोर है। उनका किरदार ऐसा है, जो न तो सीधे चल पाता है, न ही किसी की आंखों में आंखें डालकर बात कर पाता है।
वहीं, विलेन के कैंप में जयाराम ने मोपिदेवी के भाई की भूमिका निभाई है। उनका किरदार भी हास्यास्पद और जरूरत से ज्यादा नाटकीय लगता है। श्रीकांत, जो मुख्यमंत्री सत्य मूर्ति की भूमिका में हैं, कहानी को गंभीरता देने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनका ट्रैक भी अधूरा सा लगता है।
एक्टिंग: राम चरण ने मेहनत की, एसजे सूर्या ने बाजी मारी
राम चरण ने अपनी भूमिका में पूरी मेहनत की है। एक्शन सीन्स में वो काफी दमदार लगे हैं, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट के कारण उनकी परफॉर्मेंस वो प्रभाव नहीं छोड़ पाती।
एसजे सूर्या ने विलेन के रूप में जबरदस्त अभिनय किया है। हर सीन में उनका दबदबा साफ झलकता है। वहीं, कियारा आडवाणी का रोल केवल गानों तक सीमित है, जिससे उनका किरदार फीका पड़ जाता है। अनजली ने फ्लैशबैक सीक्वेंस में अच्छा काम किया, लेकिन उनका स्क्रीन टाइम बहुत कम है।
म्यूजिक और विजुअल्स
थमन का म्यूजिक इस बार उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। गाने औसत हैं और बैकग्राउंड स्कोर में भी कोई खास नयापन नहीं है। हालांकि, तिर्रु की सिनेमैटोग्राफी शानदार है। हर फ्रेम को भव्य तरीके से शूट किया गया है, जो शंकर की फिल्मों का एक मजबूत पक्ष होता है।
बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
गेम चेंजर ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त शुरुआत की है। रिलीज के पहले दिन ही फिल्म ने भारत में 51 करोड़ रुपये और विश्वभर में 186 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। निर्माताओं के दावे के मुताबिक, यह राम चरण की पिछले छह सालों में पहली सोलो फिल्म है और इसे दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया के बावजूद अच्छी ओपनिंग मिली है।
फाइनल वर्डिक्ट
गेम चेंजर एक भव्य एक्शन फिल्म है, जिसमें दमदार एक्शन, शानदार विजुअल्स और बड़े सितारे तो हैं, लेकिन कहानी की कमी इसे एक औसत फिल्म बना देती है। फिल्म का पहला भाग बिखरा हुआ और तर्कहीन है, जबकि दूसरा भाग थोड़ा बेहतर है।
अगर आप राम चरण के फैन हैं या सिर्फ भव्य एक्शन फिल्मों का आनंद लेते हैं, तो आप इसे एक बार देख सकते हैं। लेकिन अगर आप एक नई और दमदार कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो गेम चेंजर आपको निराश कर सकती है।
रेटिंग: 3/5
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